होर्मुज पर जंग का साया: भारत ने बदला तेल-LNG का रास्ता, ईरान की नई चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बढ़े सैन्य तनाव का असर अब दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा सप्लाई लाइनों पर दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेजी से कम हुई है और कई कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक समुद्री और पाइपलाइन मार्ग तलाश रही हैं।

S&P Global Energy से जुड़े शोध के मुताबिक, फारस की खाड़ी से कच्चे तेल और LNG के निर्यात पर संघर्ष का दबाव बढ़ रहा है। 17 जून के समझौते के बाद ऊर्जा निर्यात में जो तेजी देखने को मिली थी, वह नए तनाव के बाद फिर कमजोर पड़ गई है।

भारत ने तैयार किया वैकल्पिक रास्ता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए होर्मुज पर निर्भरता से जुड़े जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहा है। कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति के लिए UAE और ओमान से जुड़े वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में होर्मुज में लंबे समय तक रुकावट आने का सीधा असर तेल और गैस की सप्लाई के साथ उनकी कीमतों पर भी पड़ सकता है।

ईरान की चेतावनी से बढ़ी चिंता

इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने संकेत दिया है कि अगर उसके तेल निर्यात को रोकने की कोशिश की गई, तो फुजैरा पाइपलाइन और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग भी निशाने पर आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

होर्मुज से तेजी से घट रही LNG जहाजों की आवाजाही

S&P Global Energy के पोत ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज से गुजरने वाले लदे LNG जहाजों का 10 दिन का औसत जून के आखिर में करीब 0.8 कार्गो प्रतिदिन था, जो 15 जुलाई तक घटकर केवल 0.2 कार्गो प्रतिदिन रह गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह फारस की खाड़ी से सिर्फ एक LNG कार्गो के बाहर निकलने की जानकारी मिली। जहाजरानी कंपनियों में बढ़ती सतर्कता को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

उत्पादन जारी, लेकिन समुद्र में फंसी सप्लाई

दिलचस्प बात यह है कि LNG का उत्पादन और जहाजों पर लोडिंग पूरी तरह नहीं रुकी है। कतर और UAE में उत्पादन जारी रहने के कारण बड़ी मात्रा में LNG से लदे टैंकर फारस की खाड़ी के अंदर इंतजार कर रहे हैं।

जुलाई के मध्य तक अकेले कतर के सात लदे LNG जहाजों में करीब 5.7 लाख मीट्रिक टन LNG होने का अनुमान लगाया गया है। वहीं फारस की खाड़ी में मौजूद कुल LNG टैंकर क्षमता करीब 19 लाख मीट्रिक टन बताई जा रही है।

अगर आने वाले दिनों में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो पहले से तैयार और लोड की गई LNG तेजी से वैश्विक बाजार में पहुंच सकती है। लेकिन तनाव लंबा खिंचा तो इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

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