उत्तर कोरिया ने इस सप्ताह क्लस्टर बॉम्ब वॉरहेड से लैस बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। राज्य मीडिया KCNA के अनुसार, यह मिसाइल 6.5 से 7 हेक्टेयर (लगभग 10 फुटबॉल मैदानों) के क्षेत्र को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखती है।
परीक्षण 6 से 8 अप्रैल के बीच तीन दिनों तक चला। इसमें Hwasong-11 टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल पर क्लस्टर मुनिशन वॉरहेड लगाकर लॉन्च किया गया। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
अन्य हथियारों का भी परीक्षण
उत्तर कोरिया ने इसी दौरान कई अन्य आधुनिक हथियार सिस्टम भी टेस्ट किए:
- इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेपन सिस्टम
- कार्बन फाइबर बम (ब्लैकआउट बॉम्ब), जो बिजली ग्रिड और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को निष्क्रिय कर सकता है
- मोबाइल शॉर्ट-रेंज एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम
जनरल किम जोंग सिक ने इन परीक्षणों की निगरानी की और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेपन तथा कार्बन फाइबर बम को “रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विशेष संपत्ति” बताया। क्लस्टर मुनिशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद हैं क्योंकि ये बड़े क्षेत्र में छोटे-छोटे बम बिखेरते हैं, जिससे नागरिकों को अनावश्यक खतरा होता है। कई देशों ने इन पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन उत्तर कोरिया इनका इस्तेमाल बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण मुख्य रूप से दक्षिण कोरिया के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमता दिखाने का हिस्सा है। दक्षिण कोरिया और जापान दोनों ने इन लॉन्च पर नजर रखी और अलर्ट जारी किया है। यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन माना जा रहा है, जो उत्तर कोरिया को बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियां करने से रोकते हैं।
वर्तमान स्थिति…
अभी तक उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन इन परीक्षणों के दौरान मौजूद थे या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे परीक्षण कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ा सकते हैं, खासकर जब अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास भी चल रहे हैं।

