भारत और वियतनाम ने डिजिटल तकनीक, दुर्लभ खनिज, दवा नियमन, डिजिटल भुगतान, संस्कृति, पर्यटन और सार्वजनिक क्षेत्र लेखापरीक्षा समेत कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो-लाम के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुए। दोनों नेताओं ने व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति बनने के एक महीने के भीतर तो-लाम की भारत यात्रा यह दर्शाती है कि वियतनाम भारत के साथ अपने संबंधों को कितनी प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि भारत वियतनाम की प्राचीन चंपा सभ्यता के माई सोन और न्हान ताऊ मंदिरों के संरक्षण का कार्य कर रहा है और अब चंपा सभ्यता की पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा।
यह भी पढ़े; अमरीका ने भारत को लौटाए लगभग 14 मिलियन डॉलर मूल्य के 657 पुरावशेष!
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और वियतनाम की साझेदारी “विरासत और विकास” दोनों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत से भेजे गए बौद्ध अवशेषों के दर्शन वियतनाम की बड़ी आबादी ने किए थे, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हुए हैं। इसके अलावा दवा नियामक समझौते के बाद वियतनाम में भारतीय दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और कृषि व मत्स्य उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
दोनों देशों ने वित्तीय संपर्क बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग मजबूत करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की UPI और वियतनाम की त्वरित भुगतान प्रणाली को जल्द जोड़ा जाएगा। उन्होंने वियतनाम को भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और “विजन ओशन” का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि रक्षा और सुरक्षा सहयोग के जरिए दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करेंगे।

