विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे महीने बिकवाली जारी रखते हुए मई 2026 में 32,963 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके साथ ही वर्ष 2026 में अब तक भारतीय बाजार से एफपीआई की कुल निकासी 2.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है, लेकिन यह अभी भी तनाव से पहले के स्तर की तुलना में अधिक बनी हुई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई के दौरान एफपीआई ने भारतीय ऋण बाजार (Debt Market) के डेट जनरल लिमिट वर्ग से 100 करोड़ रुपये और वीआरआर (VRR) श्रेणी से 1,548 करोड़ रुपये की निकासी की। वहीं एफएआर (FAR) श्रेणी में 4,405 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जिससे इस वर्ग में सकारात्मक प्रवाह देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर आगे भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी, जिसका असर भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश के रुख पर पड़ सकता है।
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