मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में उत्पन्न स्थिति ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक मजबूत रणनीति तैयार कर ली है, जिससे देश में तेल संकट की संभावना काफी कम हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस मुद्दे पर बात करते हुए बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है और कई विशेष समूह (task forces) बनाए गए हैं।
रूस से बड़ी डील: भारत ने बढ़ाई तेल खरीद
मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अप्रैल महीने के लिए लगभग 6 करोड़ बैरल (60 million barrels) रूसी तेल बुक किया है।
यह खरीदारी सामान्य से काफी ज्यादा है और फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुनी बताई जा रही है। हालांकि यह तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल अधिक कीमत (premium) पर लिया गया है, फिर भी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला जरूरी माना जा रहा है।
क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?
दरअसल, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में कई तेल टैंकर फंस गए हैं। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्गों में से एक है, और इसके प्रभावित होने से कई देशों की सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, ने इस जोखिम को देखते हुए पहले से तैयारी शुरू कर दी।
पुराने साथी रूस का मिला साथ
भारत ने इस मुश्किल समय में अपने पुराने सहयोगी रूस की ओर रुख किया। यूक्रेन युद्ध के बाद से ही रूस भारत के लिए एक बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है। हालांकि, पिछले साल अमेरिका के दबाव के चलते भारत ने रूसी तेल की खरीद कुछ कम कर दी थी, लेकिन मौजूदा हालात में फिर से रूस से खरीद बढ़ा दी गई है।
अमेरिका द्वारा कुछ शर्तों में ढील दिए जाने के बाद भारत को यह फैसला लेने में आसानी हुई।
अन्य देशों से भी बढ़ी खरीद
भारत केवल रूस पर निर्भर नहीं रहना चाहता। ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए देश ने अन्य विकल्पों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल में वेनेजुएला से करीब 8 मिलियन बैरल तेल आने की संभावना है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे ज्यादा है।
इसके अलावा, भारत पहले सऊदी अरब और इराक से भी बड़ी मात्रा में तेल आयात करता रहा है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के कारण इन क्षेत्रों से सप्लाई प्रभावित हुई है।
भारत की रणनीति: Diversification + सुरक्षा
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारत अब अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव कर रहा है। केवल एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय, देश अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदकर जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहा है।
सरकार की यह रणनीति सुनिश्चित करती है कि चाहे होर्मुज खुला रहे या बंद, भारत की ऊर्जा जरूरतों पर बड़ा असर न पड़े।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भारत ने समय रहते जो कदम उठाए हैं, वे उसकी मजबूत कूटनीति और आर्थिक योजना को दर्शाते हैं। रूस से बढ़ती खरीद, नए सप्लायर्स की तलाश और रणनीतिक प्लानिंग—ये सभी कदम देश को संभावित ऊर्जा संकट से बचाने में मदद कर सकते हैं।

