आत्मनिर्भर रक्षा की ओर कदम: नौसेना के लिए अत्याधुनिक LCT सुविधा का शिलान्यास

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में DRDO की प्रमुख प्रयोगशाला नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) में अत्याधुनिक ‘लार्ज कैविटेशन टनल’ (LCT) सुविधा की आधारशिला रखी। यह परियोजना भारत की नौसेना अनुसंधान और परीक्षण क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।

नौसेना अनुसंधान में बड़ा कदम

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह सुविधा भारत को अपने संसाधनों के बल पर उपकरणों, प्रणालियों और उप-प्रणालियों को स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और परीक्षण करने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक कई महत्वपूर्ण परीक्षणों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस परियोजना के शुरू होने के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। स्टेल्थ और आधुनिक तकनीक को मिलेगा बढ़ावा।

यह अत्याधुनिक सुविधा:प्रणोदन प्रणाली (Propulsion Systems) को मजबूत करेगी
जहाजों और पनडुब्बियों में शोर कम करने में मदद करेगी
नौसेना की स्टेल्थ क्षमता को बढ़ाएगी
भविष्य के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के डिजाइन में अहम भूमिका निभाएगी
आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम

रक्षा मंत्री ने इस परियोजना को Narendra Modi के ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प का मजबूत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश ने घरेलू उद्योग, MSME, शोधकर्ताओं और युवाओं के सहयोग से कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल की है, और यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मानव-चालित AUV के लाइव प्रदर्शन ने भारत की भविष्य की समुद्री युद्ध क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया। रक्षा मंत्री ने स्वार्म टेक्नोलॉजी और लिथियम-आयन बैटरी विकास कार्यों की सराहना करते हुए इन्हें भविष्य की युद्ध-तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।ह सुविधा क्लोज्ड-लूप और फ्री-सरफेस सिमुलेशन दोनों को सपोर्ट करेगी, जिससे यह वैश्विक स्तर पर एक अनूठा इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगी। इस परियोजना के शुरू होने के बाद भारत न सिर्फ अपनी नौसैनिक तकनीक में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक मजबूत रक्षा तकनीकी शक्ति के रूप में भी उभरेगा।

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