भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी एक बार फिर सुर्खियों में है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अब भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बची हुई दो यूनिट तय समय से पहले ही देने की तैयारी में है। यह कदम न केवल दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है, बल्कि भारत की सुरक्षा क्षमता को भी एक नया आयाम देने वाला है।
तय समय से पहले डिलीवरी की तैयारी
पहले जहां इन दोनों S-400 यूनिट्स की डिलीवरी 2027 तक पूरी होने की उम्मीद थी, वहीं अब इसे तेज करते हुए 2026 में ही पूरा करने की योजना बनाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, एक यूनिट की डिलीवरी जल्द, संभवतः अप्रैल के आसपास हो सकती है, जबकि दूसरी यूनिट साल के अंत तक भारत को मिल सकती है। यूक्रेन युद्ध के कारण पहले सप्लाई में देरी हो रही थी, लेकिन अब रूस ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
S-400: भारत की वायु सुरक्षा का मजबूत आधार
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम दुनिया के सबसे उन्नत और शक्तिशाली सिस्टम्स में गिना जाता है। यह लगभग 600 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को ट्रैक करने की क्षमता रखता है और 400 किलोमीटर तक दुश्मन को निशाना बना सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और कई टारगेट्स को एक साथ नष्ट कर सकता है।
यह मल्टी-लेयर सिस्टम अलग-अलग दूरी के हिसाब से काम करता है और इसकी तेज गति वाली मिसाइलों से बच पाना बेहद मुश्किल होता है। इसके अलावा, यह पूरी तरह मोबाइल सिस्टम है, जिसे बहुत कम समय में ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा सकता है। भारत ने इसकी ताकत और सटीकता को देखते हुए इसे ‘सुदर्शन चक्र’ नाम दिया है।
Pantsir-S1M: S-400 का सुरक्षा कवच
S-400 के साथ रूस ने Pantsir-S1M सिस्टम का भी प्रस्ताव दिया है, जो एक तरह से इसका “बॉडीगार्ड” माना जाता है। यह सिस्टम खासतौर पर ड्रोन, क्रूज मिसाइल और जमीन के पास उड़ने वाले खतरों को रोकने में सक्षम है।
आधुनिक युद्ध में अक्सर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने के लिए पहले छोटे ड्रोन या मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में Pantsir-S1M पहले ही इन खतरों को खत्म कर देता है और S-400 को सुरक्षित बनाए रखता है।
2018 का ऐतिहासिक समझौता और आगे की योजना
भारत और रूस के बीच S-400 को लेकर 2018 में करीब 5.4 अरब डॉलर की डील हुई थी। इस समझौते के तहत भारत को कुल पांच सिस्टम मिलने थे, जिनमें से तीन पहले ही मिल चुके हैं और अब बाकी दो भी जल्द डिलीवर हो जाएंगे।
इसके अलावा, भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए भविष्य में अतिरिक्त मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना भी बना रहा है। हाल ही में रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने हजारों करोड़ रुपये की लागत से S-400 मिसाइलों की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी दी है।

