होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी में ईरान, वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

तेहरान: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की योजना बना रहा है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट रूट्स में से एक है।

क्या है ईरान की नई योजना?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की संसद एक ऐसा कानून तैयार कर रही है जिसके तहत:

  • होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लिया जाएगा
  • यह शुल्क जहाजों की सुरक्षा और निगरानी के बदले वसूला जाएगा

इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इसे कानूनी मंजूरी मिल सकती है।

क्यों उठाया जा रहा है यह कदम?

ईरान का कहना है कि:

  • होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है
  • यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है
  • इसलिए सुरक्षा के बदले शुल्क लेना उचित है

ईरान इसे एक सामान्य ट्रांजिट फीस की तरह देख रहा है, जैसा कि कई देशों में दूसरे मार्गों पर लिया जाता है।

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर असर

होर्मुज स्ट्रेट से:

  • दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है
  • कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी रास्ते पर निर्भर हैं

अगर यहां शुल्क या रुकावट बढ़ती है, तो:

  • तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है
  • सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
  • वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है

भारत और अन्य देशों के लिए क्या स्थिति?

हालांकि ईरान ने संकेत दिए हैं कि:

  • भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक और रूस जैसे देशों के जहाजों के लिए
  • फिलहाल आवाजाही में कोई बड़ी बाधा नहीं होगी

लेकिन भविष्य में शुल्क लागू होने पर इन देशों को भी आर्थिक असर झेलना पड़ सकता है।

पहले से वसूले जा चुके शुल्क?

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि:

  • ईरान ने कुछ जहाजों से पहले ही लाखों डॉलर तक शुल्क वसूला है
  • और लंबे समय में इससे अरबों डॉलर की कमाई का लक्ष्य रखा गया है

हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि सीमित है।

निष्कर्ष

होर्मुज स्ट्रेट पर शुल्क लगाने की योजना सिर्फ एक क्षेत्रीय फैसला नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *